काराकाट प्रखण्ड में इस बार भीमसेनी एकदशी का व्रत अधिकांश श्रद्धालुओं ने शनिवार को वैष्णव एकादशी पर किया। घरवासडीह,ओसांव, मानिक परासी, कर्मा, धवनी, संसार डिहरी समेत कई गांवों में हजारो महिला – पुरुष श्रद्धालुओं ने 24 घन्टे का निर्जल उपवास रखा। हलाकि मोथा,पिपरा आदि गांवों से जुड़े कुछ श्रद्धालुओं ने कल शुक्रवार को ही व्रत सम्पन्न किया। महिला श्रद्धालुओं ने सुबह आहर, पोखर में स्नान कर सामूहिक रूप से भजन- कीर्तन किया। काराकाट में मां काली मंदिर व महाबीर मंदिर मोथा, जयश्री, धनछुहा में महिलाओं की समूह ने पूरे दिन भजन- कीर्तन कर भगवान श्रीहरि विष्णु को याद किया। काराकाट की पुनिता देवी, संध्या देवी, मोथा की मीना देवी व गोडारी की इला त्रिपाठी के अनुसार जेष्ठ शुक्ल पक्ष के इस एकादशी को श्रद्धा पूर्वक और नियमानुकूल करने से सभी 24 एकादशी का फल एक साथ मिल जाता है। सुबह पारण के पहले जल से भरा कुम्भ, पंखा ( बेना) व अनाज आदि दान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यह सुख, समृद्धि के साथ सीधा मोक्ष देने वाला व्रत है।







