काराकाट चक्रवाती तूफान के असर से लगातार हो रही वर्षा से प्रखण्ड में जनजीवन पूरी तरह अस्त- व्यस्त हो गया है। लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो गया हसि। काराकाट, गोड़ारी बेलवाइ व सकला आदि बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है, जिससे चुनाव का रंग भी फीका लगता है। कई सड़कों पर जल जमाव की स्थिति बन गया है। वहीं गांवों की गलियों में कीचड़ फैलने से ग्रामीणों को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ा है। धान की फसल खेतों में ही गिर गई है। कई खेतों में पकी हुई धान का पथारी जलमग्न है। गांव के कच्ची सड़कों पर कीचड़ से परेशानी बढ़ गया है।
मोथा के भूली सिंह कहते हैं कि धान की फसल उपजाने में खून पसीना एक कर काफी खर्च किया गया था।अब पूरे खेत में पानी तैर रहा है।लगता है भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।
जयश्री के कमलेश दुबे कहते है कि धान की फसल कटनी के कगार पर थी।अब सारा खेत पानी में डूब गया है। फसल गल जाएगी और हमें भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।
इसी गांव के किसान राजेश सिंह, मोथा के बिशेन्द्र यादव, अमरथा के चन्द्रशेखर तिवारी सहित कई किसानों का कहना है कि पानी छूटने का नाम नहीं ले रहा है। खेतों से नमी के कारण फसल काटना भी सम्भव नहीं होगा। सरकार को सर्वे कराकर क्षति का उचित मुआवजा देना चाहिए।









